दादी माँ का आयुर्वेदिक नुस्खा - गिलोय के फायदे


 

गिलोय (Tinospora cordifolia) — सम्पूर्ण परिचय व गिलोय जूस

गिलोय क्या है?

गिलोय, जिसे आयुर्वेद में अमृता, गुडूची या गिलोयवल्लरी के नाम से जाना जाता है, एक प्रमुख औषधीय बेल है। इसके पत्ते हृदय के आकार के होते हैं और इसका तना गांठदार दिखाई देता है। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में गिलोय को “त्रिदोषनाशक” कहा गया है, यानी यह वात, पित्त और कफ तीनों को संतुलित करती है।

गिलोय का महत्व

भारत में गिलोय का उपयोग सदियों से किया जा रहा है। इसे जीवनशक्ति बढ़ाने वाली वनस्पति माना जाता है। इसके अंदर मौजूद प्राकृतिक यौगिक शरीर की प्रतिरक्षा को मजबूत बनाते हैं और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं। आधुनिक शोध ने भी यह पुष्टि की है कि गिलोय में एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद हैं।

शरीर को होने वाले प्रमुख लाभ

गिलोय का नियमित और नियंत्रित सेवन शरीर को कई स्तरों पर लाभ पहुंचाता है। यह संक्रमणों से रक्षा करता है, बुखार को कम करने में मदद करता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। मौसमी बीमारियों, सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण के समय गिलोय का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

इम्युनिटी बढ़ाने में भूमिका

गिलोय को प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर माना जाता है। इसकी एंटीऑक्सिडेंट क्षमता शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालती है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है। प्रतिदिन गिलोय का सेवन शरीर में रोगों से लड़ने की शक्ति को मजबूत करता है।

पाचन शक्ति पर प्रभाव

गिलोय का सेवन पाचन तंत्र के लिए बेहद उपयोगी है। यह अपच, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है। भोजन को पचाने में सहायता करने वाले एंजाइमों को सक्रिय करता है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है।

ऊर्जा और थकान पर लाभ

यदि कोई व्यक्ति लगातार कमजोरी, थकान या सुस्ती महसूस करता है, तो गिलोय का सेवन उसके लिए फायदेमंद हो सकता है। यह शरीर के अंदर ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है और मांसपेशियों की थकान को कम करता है। प्रतिदिन गिलोय लेने वाले लोगों ने शरीर में हल्कापन और ताजगी महसूस होने की बात कही है।

गिलोय रस का महत्व

गिलोय रस शरीर में जल्दी अवशोषित होता है, इसलिए यह जूस के रूप में अत्यधिक लोकप्रिय है। सुबह खाली पेट 20–30 मिली गिलोय जूस लेने से इसका असर अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। कुछ लोग इसके कड़वे स्वाद को कम करने के लिए इसमें शहद या मिश्री मिलाकर लेते हैं।

कैसे बनाएं घरेलू गिलोय जूस?

घर पर गिलोय का जूस बनाना बेहद आसान है। इसके लिए 20–30 ग्राम ताजी गिलोय की डंडियाँ लें। उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मिक्सर में थोड़ा पानी डालकर पीस लें। इसके बाद मिश्रण को छानकर जूस निकालें। ताज़ा जूस सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है। इसे फ्रिज में 24 घंटे से अधिक न रखें क्योंकि इसकी ताजगी और प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।

सेवन की मात्रा

वयस्कों के लिए 20–30 मिली गिलोय जूस पर्याप्त है। चूर्ण का उपयोग करने पर आधा या एक चम्मच दिन में एक या दो बार लिया जा सकता है। बच्चों के लिए मात्रा कम रखनी होती है और डॉक्टर की सलाह जरूरी है। किसी भी हर्बल दवा की तरह, लंबी अवधि तक सेवन से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

सावधानियाँ

गिलोय प्राकृतिक और सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन कुछ सावधानियाँ जरूरी हैं। मधुमेह के रोगियों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए क्योंकि यह ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए। यदि किसी को किसी जड़ी-बूटी से एलर्जी होती है तो सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए।

स्वास्थ्य में गिलोय की विशेष भूमिका

आज की व्यस्त जीवनशैली में तनाव, प्रदूषण और कमजोर प्रतिरक्षा आम समस्या बन चुकी है। ऐसे समय में गिलोय एक प्राकृतिक विकल्प के रूप में शरीर को संतुलित और स्वस्थ बनाने में सहायक हो सकती है। यह शरीर को भीतर से मजबूत करती है, मानसिक तनाव कम करने में मदद करती है और शरीर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाती है।

निष्कर्ष

गिलोय एक बहुमूल्य आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो शारीरिक, मानसिक और प्रतिरक्षा स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण योगदान देती है। सही मात्रा और नियमितता के साथ इसका सेवन शरीर को ऊर्जा, संतुलन और रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह एक सरल लेकिन प्रभावी प्राकृतिक उपाय है जो आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य बनाए रखने में मददगार साबित होता है।

लेखक :- N.S. Kale

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